Saturday, December 24, 2016

Jai Patni Rani

https://youtu.be/AkxIgrNP8aI

Friday, December 23, 2016

नर पर नारी भारी

हास्य कविता  **

😀😀😀😀😀😀😀
अक्ल बाटने लगे विधाता,
             लंबी लगी कतारें ।
सभी आदमी खड़े हुए थे,
            कहीं नहीं थी नारी ।

सभी नारियाँ कहाँ रह गई.
          था ये अचरज भारी ।
पता चला ब्यूटी पार्लर में,
          पहुँच गई थी सारी।

मेकअप की थी गहन प्रक्रिया,
           एक एक पर भारी ।
बैठी थीं कुछ इंतजार में,
          कब आएगी बारी ।

उधर विधाता ने पुरूषों में,
         अक्ल बाँट दी सारी ।
ब्यूटी पार्लर से फुर्सत पाकर,
        जब पहुँची सब नारी ।

बोर्ड लगा था स्टॉक ख़त्म है,
        नहीं अक्ल अब बाकी ।
रोने लगी सभी महिलाएं ,
        नींद खुली ब्रह्मा की ।

पूछा कैसा शोर हो रहा है,
         ब्रह्मलोक के द्वारे ?
पता चला कि स्टॉक अक्ल का
          पुरुष ले गए सारे ।

ब्रह्मा जी ने कहा देवियों ,
          बहुत देर कर दी है ।
जितनी भी थी अक्ल वो मैंने,
          पुरुषों में भर दी है ।

लगी चीखने महिलाये ,
         ये कैसा न्याय तुम्हारा?
कुछ भी करो हमें तो चाहिए.
          आधा भाग हमारा ।

पुरुषो में शारीरिक बल है,
          हम ठहरी अबलाएं ।
अक्ल हमारे लिए जरुरी ,
         निज रक्षा कर पाएं ।

सोचकर दाढ़ी सहलाकर ,
         तब बोले ब्रह्मा जी ।
एक वरदान तुम्हे देता हूँ ,
         अब हो जाओ राजी ।

थोड़ी सी भी हँसी तुम्हारी ,
         रहे पुरुष पर भारी ।
कितना भी वह अक्लमंद हो,
         अक्ल जायेगी मारी ।

एक औरत ने तर्क दिया,
        मुश्किल बहुत होती है।
हंसने से ज्यादा महिलाये,
        जीवन भर रोती है ।

ब्रह्मा बोले यही कार्य तब,
        रोना भी कर देगा ।
औरत का रोना भी नर की,
        अक्ल हर लेगा ।

एक अधेड़ बोली बाबा ,
       हंसना रोना नहीं आता ।
झगड़े में है सिद्धहस्त हम,
       खूब झगड़ना भाता ।

ब्रह्मा बोले चलो मान ली,
       यह भी बात तुम्हारी ।
झगडे के आगे भी नर की,
       अक्ल जायेगी मारी ।

ब्रह्मा बोले सुनो ध्यान से,
       अंतिम वचन हमारा ।
तीन शस्त्र अब तुम्हे दिए.
       पूरा न्याय हमारा ।

इन अचूक शस्त्रों में भी,
       जो मानव नहीं फंसेगा ।निश्चित समझो,
       उसका घर नहीं बसेगा ।

कहे कवि मित्र ध्यान से,
       सुन लो बात हमारी ।
बिना अक्ल के भी होती है,
       नर पर नारी भारी।

�😇😜😃😂

Thursday, December 22, 2016

नर पर नारी भारी

हास्य कविता  **

😀😀😀😀😀😀😀
अक्ल बाटने लगे विधाता,
             लंबी लगी कतारें ।
सभी आदमी खड़े हुए थे,
            कहीं नहीं थी नारी ।

सभी नारियाँ कहाँ रह गई.
          था ये अचरज भारी ।
पता चला ब्यूटी पार्लर में,
          पहुँच गई थी सारी।

मेकअप की थी गहन प्रक्रिया,
           एक एक पर भारी ।
बैठी थीं कुछ इंतजार में,
          कब आएगी बारी ।

उधर विधाता ने पुरूषों में,
         अक्ल बाँट दी सारी ।
ब्यूटी पार्लर से फुर्सत पाकर,
        जब पहुँची सब नारी ।

बोर्ड लगा था स्टॉक ख़त्म है,
        नहीं अक्ल अब बाकी ।
रोने लगी सभी महिलाएं ,
        नींद खुली ब्रह्मा की ।

पूछा कैसा शोर हो रहा है,
         ब्रह्मलोक के द्वारे ?
पता चला कि स्टॉक अक्ल का
          पुरुष ले गए सारे ।

ब्रह्मा जी ने कहा देवियों ,
          बहुत देर कर दी है ।
जितनी भी थी अक्ल वो मैंने,
          पुरुषों में भर दी है ।

लगी चीखने महिलाये ,
         ये कैसा न्याय तुम्हारा?
कुछ भी करो हमें तो चाहिए.
          आधा भाग हमारा ।

पुरुषो में शारीरिक बल है,
          हम ठहरी अबलाएं ।
अक्ल हमारे लिए जरुरी ,
         निज रक्षा कर पाएं ।

सोचकर दाढ़ी सहलाकर ,
         तब बोले ब्रह्मा जी ।
एक वरदान तुम्हे देता हूँ ,
         अब हो जाओ राजी ।

थोड़ी सी भी हँसी तुम्हारी ,
         रहे पुरुष पर भारी ।
कितना भी वह अक्लमंद हो,
         अक्ल जायेगी मारी ।

एक औरत ने तर्क दिया,
        मुश्किल बहुत होती है।
हंसने से ज्यादा महिलाये,
        जीवन भर रोती है ।

ब्रह्मा बोले यही कार्य तब,
        रोना भी कर देगा ।
औरत का रोना भी नर की,
        अक्ल हर लेगा ।

एक अधेड़ बोली बाबा ,
       हंसना रोना नहीं आता ।
झगड़े में है सिद्धहस्त हम,
       खूब झगड़ना भाता ।

ब्रह्मा बोले चलो मान ली,
       यह भी बात तुम्हारी ।
झगडे के आगे भी नर की,
       अक्ल जायेगी मारी ।

ब्रह्मा बोले सुनो ध्यान से,
       अंतिम वचन हमारा ।
तीन शस्त्र अब तुम्हे दिए.
       पूरा न्याय हमारा ।

इन अचूक शस्त्रों में भी,
       जो मानव नहीं फंसेगा ।निश्चित समझो,
       उसका घर नहीं बसेगा ।

कहे कवि मित्र ध्यान से,
       सुन लो बात हमारी ।
बिना अक्ल के भी होती है,
       नर पर नारी भारी।

�😇😜😃😂

नर पर नारी भारी

हास्य कविता  **

😀😀😀😀😀😀😀
अक्ल बाटने लगे विधाता,
             लंबी लगी कतारें ।
सभी आदमी खड़े हुए थे,
            कहीं नहीं थी नारी ।

सभी नारियाँ कहाँ रह गई.
          था ये अचरज भारी ।
पता चला ब्यूटी पार्लर में,
          पहुँच गई थी सारी।

मेकअप की थी गहन प्रक्रिया,
           एक एक पर भारी ।
बैठी थीं कुछ इंतजार में,
          कब आएगी बारी ।

उधर विधाता ने पुरूषों में,
         अक्ल बाँट दी सारी ।
ब्यूटी पार्लर से फुर्सत पाकर,
        जब पहुँची सब नारी ।

बोर्ड लगा था स्टॉक ख़त्म है,
        नहीं अक्ल अब बाकी ।
रोने लगी सभी महिलाएं ,
        नींद खुली ब्रह्मा की ।

पूछा कैसा शोर हो रहा है,
         ब्रह्मलोक के द्वारे ?
पता चला कि स्टॉक अक्ल का
          पुरुष ले गए सारे ।

ब्रह्मा जी ने कहा देवियों ,
          बहुत देर कर दी है ।
जितनी भी थी अक्ल वो मैंने,
          पुरुषों में भर दी है ।

लगी चीखने महिलाये ,
         ये कैसा न्याय तुम्हारा?
कुछ भी करो हमें तो चाहिए.
          आधा भाग हमारा ।

पुरुषो में शारीरिक बल है,
          हम ठहरी अबलाएं ।
अक्ल हमारे लिए जरुरी ,
         निज रक्षा कर पाएं ।

सोचकर दाढ़ी सहलाकर ,
         तब बोले ब्रह्मा जी ।
एक वरदान तुम्हे देता हूँ ,
         अब हो जाओ राजी ।

थोड़ी सी भी हँसी तुम्हारी ,
         रहे पुरुष पर भारी ।
कितना भी वह अक्लमंद हो,
         अक्ल जायेगी मारी ।

एक औरत ने तर्क दिया,
        मुश्किल बहुत होती है।
हंसने से ज्यादा महिलाये,
        जीवन भर रोती है ।

ब्रह्मा बोले यही कार्य तब,
        रोना भी कर देगा ।
औरत का रोना भी नर की,
        अक्ल हर लेगा ।

एक अधेड़ बोली बाबा ,
       हंसना रोना नहीं आता ।
झगड़े में है सिद्धहस्त हम,
       खूब झगड़ना भाता ।

ब्रह्मा बोले चलो मान ली,
       यह भी बात तुम्हारी ।
झगडे के आगे भी नर की,
       अक्ल जायेगी मारी ।

ब्रह्मा बोले सुनो ध्यान से,
       अंतिम वचन हमारा ।
तीन शस्त्र अब तुम्हे दिए.
       पूरा न्याय हमारा ।

इन अचूक शस्त्रों में भी,
       जो मानव नहीं फंसेगा ।निश्चित समझो,
       उसका घर नहीं बसेगा ।

कहे कवि मित्र ध्यान से,
       सुन लो बात हमारी ।
बिना अक्ल के भी होती है,
       नर पर नारी भारी।

�😇😜😃😂

Tuesday, December 20, 2016

मास्टरजी एक सवाल पूछें

शरारती बच्चा :मास्टरजी  एक सवाल पूछें

मास्टर जी      :हाँ हाँ पूछो ।
बच्चा          : हाथी को फ्रीज में कैसे रखेंगे ?

मास्टरजी  : बेवकूफ ,हाथी फ्रीज में नहीं जा
                  सकता है ।
बच्चा       : मास्टरजी फ्रीज बहुत बड़ा है ,
                पहले फ्रीज खोलेंगे और हाथी को
                अंदर डाल देंगे 😆😆
बच्चा   :       एक सवाल और पूछूँ ।
मास्टरजी :   हाँ हाँ पूछो ?
बच्चा        : गदहे को फ्रीज में कैसे रखेंगे ?

मास्टरजी : पहले फ्रीज खोलेंगे और गदहे को
                  उस में रख देंगे ।
बच्चा      :गलत जवाब,पहले हाथी को बाहर
            करेंगे फिर गदहे को फ्रीजमें रखेंगे😆
बच्चा  :        एक सवाल और पूछूँ?
मास्टरजी :    हाँ हाँ पूछो ।
बच्चा    : बंदर के जन्मदिन की पार्टी में सभी
            जानवर एवं जीव-जन्तु आए परन्तु
            एक जानवर नहीं आया । उसका
             नाम बतलायें ?
मास्टरजी : शेर नहीं आया होगा क्योंकि वह
                आता तो सभी को खा जाता !
बच्चा : फिर गलत जवाब,गदहा पार्टी में नहीं
          आया क्योंकि गदहे को तो हमने फ्रीज
           में बंद कर दिया  था 😆 😆 😆
बच्चा :  एक सवाल और पूछूँ ?
मास्टरजी :(गुस्से से ) पूछ

बच्चा :    रास्ते में एक नदी है जिसमें एक
             खतरनाक मगरमच्छ रहता है एवं
            उस नदी के ऊपर आने-जाने के लिए
           पुल भी नहीं है,आप नदी कैसे पार
            करोगे ?
मास्टरजी : मैं नाव लेकर नदी पार करूंगा !

बच्चा :        फिर गलत जवाब ।
मास्टर :      ---बोल  कैसे ?
बच्चा  : मास्टरजी इतनी जल्दी नाव कहाँ से
              आपको मिलेगी ,तबतक तो आप
             नदी तैरकर भी पार कर लोगे ।
मास्टर :मगरमच्छ से तेरा बाप बचाएगा ?
बच्चा :मास्टरजी !आप इतना डरते क्यों हो
          ? आपको तो पता है कि;सभी जीव -
           जानवर बंदर की Birthday पार्टी में
         गया हुआ है तो मगरमच्छ नदी में कैसे 
         आ जाएगा      😀😀😀😀 
😭😭मास्टरजी बेहोश हो गए 😭😭😭
हंसना बाद में पहले फारवर्ड करो

पीयो और पीने दो

🍾जब   मैंने  "दारू"
पहली  बार  पी थी,🍾

🍾में  खुद  अपनी  नज़र
में  गिर  गया  था.......🍾

🍾और  मैंने   दारू   छोड़ने    का
फैसला   कर  लिया ?🤗🤗

लेकिन  तब  मैंने,
इन  तमाम  लोगों  के  बारे  में सोचा..... .🤔🤔🤔

किसान-जो अँगूर  उगाते  है।
            👴🏻👴🏻👴🏻

वो "दारू"   फेक्टरी   के  मजदूर,
             🤕🤕🤕

🍾वो  कांच  की  बोतल   की  फेक्टरी में  काम  करने  वाले  मजदूर,

वो "बार" में  नाचने  वाली  गरीब
बार डांसर,💃💃💃

वो "बार"में  काम  करने  वाले वेटर,👲👲👲

🍾वो "कबाड़ी" जो  बोतल  इकट्ठा  कर अपना अपनी  रोजी रोटी कमाते है,🌮🌮🌮

इन सबको  लादकर  चलने वाले गरीब ट्रक ड्राइवर ,🚚🚚🚚

और उनके  बीबी बच्चों के बारे में सोचा  तो मेरी आंख भर आयी,😢😰😢

और बस......
उसी पल फैसला  किया  की  अबसे,😕😕😕

में  रोज  पियूँगा........

क्योंकि .........

"अपने  लिये तो सब जीते  है,
हम तो  गरीबों के लिये पीते है"
👳‍♀👳‍♀👳‍♀👳‍♀👳‍♀👳‍♀👳‍♀👳‍♀👳‍♀

प्लीज़  सेन्ड टू आल फ्रेंड😜

लेट देम आलसो ज्वाइन  अस.....
🍺🍺🍺🍺🍺🍺🍺🍺🍺🍺🍺🍺🍺🍷🍷🍷🍷🍷🍷🍷🍷🍷🍷

जीयो   और  जीने  दो,

पीयो   और  पीने  दो............

मास्टर...बनला पाप बा

ऐ गो मास्टर के दिल के दरद से निकलल भोजपुरी कविता के मजा लेल जाओ

अब बुझाइल ह कि मा़स्टर बनला  पाप बा
                                             
              १
समय से स्कूल आई
करी खूब पढ़ाई,
लईका  लईकी कुछुओ कर सब
करी मत कड़ाई।
मारे के त नाम मत लीही
डॉटहू के अधिकार नईखे,
गलती ओकर माने खातिर
माईयो बाबू तैयार  नईखे।
ओरहन लेके कहवा जाई,
लईका से लंगा बाप  बा
अब बुझाईल ह कि मास्टर बनला  पाप बा......
               २
जे स्कूल के मुँह ना देखलस
बोझा ढोवलस घास के,
उहो शिक्षा दे रहल बा
एम .ए., बी .ए. पास के।
जे करिया अक्षर ना जाने
उ गदहो आके टोक देता,
कुकुर जेकरा लाज न हाया
उहो आके भोंक देता।
रंग जमावता उहो जे,
बिल्कुल अंगूठा छाप बा
अब बुझाईल ह कि मास्टर.बनला  पाप बा...
                  ३
आवता जब छात्रवृत्ति के टायम
त संख्या लागता बढ़े,
जवना के नाम कट गईल बा
उहो लागता पढ़े।
बुझाते नईखे पढ़ाई से
कतना गहरा बा नाता,
जहिये पईसा मिल गइल
तहिये से भईल नापाता।
हाजिरी ओकर बनावत रही,
इ अभिभावक के चाप बा
अब बुझाईल ह कि मास्टर...बनला  पाप बा....
               
                4

पईसा खाता में आवे ताबो भौचर माँगल जाता
किताब ओकरा के बांटे के बा जेकरा नइखे पढ़ाई से नाता
बकरी चरावे वाला अध्यक्ष रोज पैसा के मांग करे
अनपढ़ संयोगिता आ के तरह तरह के स्वांग करे
नौकरी तो लगत बा जैसे ब्रह्मा जी के शाप बा
अब बुझाईल ह कि मास्टर...बनला  पाप बा....

😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀